Vision and Mission


1. उच्च शिक्षा की स्थिति
राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा के विकास पर विशेष बल दिया है | विगत दो वर्षों में कई नई योजनाओं एवं कार्यक्रमों को आरम्भ किया गया है | विगत दो वर्षों में प्राप्त की गई उपलब्धियाँ निःसंदेह बहुत उत्साहवर्द्धक है फिर
भी उच्च शिक्षा के मानक स्तर से हम अभी पीछे हैं | वर्तमान में झारखण्ड राज्य का सकल नामांकन अनुपात 15.4 % है जबकि राष्ट्रीय सकल नामांकन अनुपात 24% है | वर्ष 2022 तक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हम पहुँच,
समानता एवं गुणवत्ता के दृष्टिकोण से राष्ट्रीय मानक स्तर को प्राप्त कर सकेंगे |राज्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई समस्याएँ एवं चुनौतीयाँ हैं | जैसे :- बहुत कम सकल नामांकन अनुपात, राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले उच्च
शिक्षण संस्थानों की बहुत कम संख्या, विशिष्ट शिक्षा की कमी, शहरी एवं ग्रामीण असमानताएँ, उपलब्ध उच्च शिक्षण संस्थानों में आधारभूत संरचनाओं का विकास,उपलब्ध संस्थानों का क्षमता विकास, पुराने पाठ्यक्रमों में
संसोधन, रोजगारपरक शिक्षा का अभाव, लिंगानुपात में सुधार, शोध एवं विकास के क्षेत्र में नगण्य कार्य, शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की कमी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आदि | उक्त समस्याओं का समाधान एवं चुनौतियों
का सामना करते हुए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हम राष्ट्रीय मानक स्तर को प्राप्त करने के लिए प्रयासरत हैं |

  

2. दृष्टि एवं उदेश्य

2.1   राज्य में वर्ष 2022 तक सकल नामाकन अनुपात दर 15.4 से बढ़कर 32 करना |
2.2   वर्ष 2022 तक राज्य में 100 नये उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना करना |
2.3   राज्य कोष से विनोद बिहरी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय की स्थापना करना |
2.4   राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत बाबा वैधनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना करना |
2.5   वर्ष 2022 तक चरणबद्ध रूप में उन विधान सभा क्षेत्रों में स्नातक स्तरीय महाविद्यालयों की स्वीकृति प्रदान करना जिनमें अंगीभूत महाविद्यालय नहीं है |
2.6   प्रोन्नति एवं नियुक्ति के माध्यम से शिक्षकों एवं शिक्षकेत्त कर्मचारियों के रिक्त पदों को भरना |
2.7   बचे हुए 13 जिलों में बहुदूदेशीय परीक्षा भवन को स्वीकृत किया जाना |
2.8   राज्य के सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयो में मांग / रोजगार आधरित विषयों /संकायों का पुनर्गठन एवं पूर्व से स्वीकृत सभी पदों का पुनर्गठन करना |
2.9   11 महिला महाविद्यालयो एवं 12 मॉडल महाविद्यालयो के लिए पदों का सृजन करना |
2.10   स्ववित्तपोषित पाठ्क्रमों के लिए नियम का निमार्ण तथा जिलों में बी0 एड तथा अन्य व्यवसायिक पाठ्क्रमों को आरम्भ करना |
2.11   विद्यार्थियों की नियोजन क्षमता बेहतर करने के लिए महाविद्यालयों में कौशल विकास के पाठ्क्रमों को शामिल करना |
2.12   विश्वविद्यालयों में महिला विद्यार्थयों के लिए बसों का संचालन करना |
2.13   सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालय के परिसरों में चरणबद्ध रूप से वाई - फाई क्षेत्र विकसित करना |
2.14   विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालययों में अध्यनरत छात्र - छात्राओं को ई - लर्निग की सुविधा प्रदान करना , पठन -पाठन एवं परिसर प्रबंधन को इंटरनेट आधारित व्यवस्था में परिवर्तित करना |
2.15   राज्य में और ज्यादा नये निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना करना |
2.16   विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थयों को रोजगारोन्मुखी बनाने के लिए परिमार्जन केन्द्रों एवं उघमशीलता विकसित करने वाले केन्द्रों की स्थापना करना |
2.17   विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में उपलब्ध प्रयोगशालाओं एवं पुस्तकालयों का स्तरोन्नयन करना |
2.18   अन्तर विश्वविद्यालय परिषद् की स्थापना करना |
2.19   राज्य उच्च शिक्षा परिषद् की स्थापना करना |